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वंदना

माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे,
अज्ञानता में ज्ञान के दे दो सहारे

मद, मोह, माया, काम, में जीवन फँसा है,
आँखें कहाँ वो देखतीं जो सच हुआ है,
कोई हमारा शत्रु बाहर का न सक्षम,
हैं आंतरिक अपनी कमी से आज अक्षम,
पाएं विजय यदि क्रोध पर जग जीत लेंगे,
सारे जगत को प्रेम का संदेश देंगे,

जग जाएं सोए भाग्य कुछ अब तो हमारे,
माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे

जीवन अहिंसा, सत्य के पथ पर चले अब
अस्तेय का पालन करें औ सुख मिलें सब
सब कामनाएं हों हमारी लोकहित में
जीवन चले रख अपरिग्रह का ध्यान चित में
हम स्वच्छता का भी करें पालन सही अब
संतोष प्रतिफल में रखें, कर्मठ रहें सब

अब ज़िन्दगी में मिल सकें सच्चे सहारे
माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे

जीवन तपस से रात-दिन समृद्ध हो अब
नित स्वाध्यायों से निखरते जाएं जन सब
हर काम ईश्वर को समर्पित कर करें हम
यह भाव मन में जागृत हो, दूर हो तम
नित आसनों को भी नियम से हम लगाएं
आयाम सारे प्राण के, जीवन सजाएं

सब जानते हैं हम तुम्हारे हैं दुलारे
माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे

आचार प्रत्याहार का समुचित करें हम
अब लालसा भी बाह्य चीजों की करें कम
हम धारणा भी ध्यान की रक्खें मनन में
संभव समाधी हो, फलें फूलें जगत में
उद्देश्य जीवन का सफल हो आज सुखकर
आनन्द पाएं सब जगत में साथ मिलकर

माँ की कृपा हो तो सुखद हों सब नज़ारे
माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे

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