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वंदना

माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे, अज्ञानता में ज्ञान के दे दो सहारे मद, मोह, माया, काम, में जीवन फँसा है, आँखें कहाँ वो देखतीं जो सच हुआ है,…

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झूठ बातों को बना के सनसनी आराम से

उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…

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बच्चे गए जो भूल ये, बचपन की मस्तियाँ।

उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…

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