निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम
ग़ज़ल निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम, कहते हैं शेर रोशनी के, हर किसी से हम। बच्चों की मुस्कुराहटों पे जां निसार दें, बढ़कर उसे तो मान रहे…
ग़ज़ल निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम, कहते हैं शेर रोशनी के, हर किसी से हम। बच्चों की मुस्कुराहटों पे जां निसार दें, बढ़कर उसे तो मान रहे…
ग़ज़ल यारो, जीवन क्या होता है? कुछ का, सपनों-सा होता है। बस उस पर ही प्यार उमड़ता, जो लगता, अपना होता है। सहज भाव जिसने भी छोड़ा, वो जल्दी बूढ़ा…
भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसकी सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। यह पीढ़ी, जिसे जेनरेशन Z कहा जाता है, केवल नई तकनीक के…
भारतीय लोकतंत्र इस समय एक ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रहा है, जहाँ राजनीति केवल विचारधाराओं, दलों और चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल माध्यमों ने राजनीतिक अभिव्यक्ति…
मनुष्य स्वयं को एक जागरूक, विवेकशील और वास्तविकता को समझने वाला प्राणी मानता है। उसे विश्वास होता है कि जो कुछ उसकी आँखें देखती हैं, कान सुनते हैं, त्वचा स्पर्श…
लोई एक सुंदर, सरल और संवेदनशील युवती थी। उसके गाँव में एक युवक रहता था, जो उसके गुणों और सौंदर्य से प्रभावित था। दोनों के बीच आत्मीयता विकसित हुई। उस…
तुलसीदास और रहीम : लोककथा, इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का अमर संवाद भारतीय साहित्य का वैभव केवल उसकी महान काव्य-कृतियों में ही नहीं, बल्कि उन मानवीय संबंधों में भी…
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड असंख्य कणों, ऊर्जाओं, शक्तियों, जीवों, विचारों और घटनाओं का एक ऐसा गतिशील तंत्र है जिसमें कुछ भी पूर्णतः पृथक् या स्वतंत्र नहीं है। प्रत्येक कण किसी न किसी…
वीरेन्द्र कुमार शेखर आबरू शायरी की रखा कीजिए, दिल से दिल की ग़ज़ल ही कहा कीजिए। है तमन्ना अगर अब अमन-चैन की, ख़ुद से ख़ुद तो न अक्सर लड़ा कीजिये।…
वीरेन्द्र कुमार शेखर वक़्त मुझसे दोस्ती ही दोस्ती करता रहा, और उसके साथ मैं बस दिल्लगी करता रहा | मानकर उसको मसीहा, पूजते मक़्तूल थे, जिब्ह करते बात कुछ जो…