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प्रज्ञा, करुणा और उनके अनुसार कर्म करने का औचित्य

नागार्जुन के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु अनेक कारणों और परिस्थितियों पर निर्भर होकर अस्तित्व में आती है। कोई भी वस्तु अपने बल पर न उत्पन्न होती है और न…

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ग़ज़लें पहले शराब पीती थीं, नीम का रस पिला रहे हैं हम : डॉ बशीर बद्र

शायरी का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक चेतना का एक उज्ज्वल अध्याय है। यह केवल शब्दों की कलात्मक सजावट नहीं, बल्कि मानव हृदय की संवेदनाओं, अनुभूतियों और जीवन-दर्शन की एक…

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इश्क़, प्रेम… प्यार, कैसे व्यक्त करूँ इस भाव को ?

इश्क़—यह शब्द अपने भीतर एक ऐसा मधुर संगीत समेटे हुए है, जिसकी प्रतिध्वनि मनुष्य के अस्तित्व के सबसे गहरे कक्षों तक सुनाई देती है। यह केवल आकर्षण नहीं, केवल चाहत…

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झूठ बातों को बना के सनसनी आराम से

उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…

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बच्चे गए जो भूल ये, बचपन की मस्तियाँ।

उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…

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