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ग़ज़ल

वीरेन्द्र कुमार शेखर आबरू शायरी की रखा कीजिए, दिल से दिल की ग़ज़ल ही कहा कीजिए। है तमन्ना अगर अब अमन-चैन की, ख़ुद से ख़ुद तो न अक्सर लड़ा कीजिये।…

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ग़ज़ल

वीरेन्द्र कुमार शेखर वक़्त मुझसे दोस्ती ही दोस्ती करता रहा, और उसके साथ मैं बस दिल्लगी करता रहा | मानकर उसको मसीहा, पूजते मक़्तूल थे, जिब्ह करते बात कुछ जो…

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Shayri-VK-Shekhar

ग़ज़ल

वीरेन्द्र कुमार शेखर क्या मैं इतनी भी न हसरत करता? वो ज़रा प्यार से रुख़सत करता। यार इतनी तो शरारत करता, तर्क करने को मुहब्बत करता। उससे बस एक शिकायत…

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Karbala

मनक़बत

डॉ. वीरेन्द्र कुमार 'शेखर' हक़ी़क़तों को बताती,है करबला अब तक उन्हीं का सोग मनाती, है करबला अब तक शहादतों को जो ईमान मानते आए उन्हीं को राह दिखाती, है करबला…

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वंदना

माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे, अज्ञानता में ज्ञान के दे दो सहारे मद, मोह, माया, काम, में जीवन फँसा है, आँखें कहाँ वो देखतीं जो सच हुआ है,…

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झूठ बातों को बना के सनसनी आराम से

उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…

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