निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम
ग़ज़ल निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम, कहते हैं शेर रोशनी के, हर किसी से हम। बच्चों की मुस्कुराहटों पे जां निसार दें, बढ़कर उसे तो मान रहे…
ग़ज़ल निर्वाह कर सके न कभी तीरगी से हम, कहते हैं शेर रोशनी के, हर किसी से हम। बच्चों की मुस्कुराहटों पे जां निसार दें, बढ़कर उसे तो मान रहे…
ग़ज़ल यारो, जीवन क्या होता है? कुछ का, सपनों-सा होता है। बस उस पर ही प्यार उमड़ता, जो लगता, अपना होता है। सहज भाव जिसने भी छोड़ा, वो जल्दी बूढ़ा…
वीरेन्द्र कुमार शेखर आबरू शायरी की रखा कीजिए, दिल से दिल की ग़ज़ल ही कहा कीजिए। है तमन्ना अगर अब अमन-चैन की, ख़ुद से ख़ुद तो न अक्सर लड़ा कीजिये।…
वीरेन्द्र कुमार शेखर वक़्त मुझसे दोस्ती ही दोस्ती करता रहा, और उसके साथ मैं बस दिल्लगी करता रहा | मानकर उसको मसीहा, पूजते मक़्तूल थे, जिब्ह करते बात कुछ जो…
वीरेन्द्र कुमार शेखर क्या मैं इतनी भी न हसरत करता? वो ज़रा प्यार से रुख़सत करता। यार इतनी तो शरारत करता, तर्क करने को मुहब्बत करता। उससे बस एक शिकायत…
डॉ. वीरेन्द्र कुमार 'शेखर' हक़ी़क़तों को बताती,है करबला अब तक उन्हीं का सोग मनाती, है करबला अब तक शहादतों को जो ईमान मानते आए उन्हीं को राह दिखाती, है करबला…
माँ शारदे, वरदान दो, हम शिशु तुम्हारे, अज्ञानता में ज्ञान के दे दो सहारे मद, मोह, माया, काम, में जीवन फँसा है, आँखें कहाँ वो देखतीं जो सच हुआ है,…
इश्क में जब हम ख़ुदी को भूलते हैं बन्दगी में, ज़िन्दगी को भूलते हैं क्या भयानक बाढ़ ये लाती रही है शह्र में जब हम नदी को भूलते हैं ये…
सोचने ही से मुरादें तो नहीं मिल जाती ऐसा होता तो हर एक दिल कि तमन्ना खिलती कोशिशें लाख सही बात नहीं बनती है ऐसा होता तो हर एक राही…
उँगली दिखा के एक, बताता जो ग़ल्तियाँ, उसकी तरफ भी तीन हुआ करतीं उँगलियाँ। गोली विटामिनों की उन्हें दे रहे हैं वो, जिनको न मिल सकीं हैं कभी ढंग से…