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Shayri-VK-Shekhar

ग़ज़ल

वीरेन्द्र कुमार शेखर क्या मैं इतनी भी न हसरत करता? वो ज़रा प्यार से रुख़सत करता। यार इतनी तो शरारत करता, तर्क करने को मुहब्बत करता। उससे बस एक शिकायत…

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Buddha

हमारे दुखों का कारण है अज्ञानता और ज्ञान वही है जो प्रमाणित हो

साहित्य का संसार कल्पना, प्रतीक, भाव और सौन्दर्य का संसार है। कवि और लेखक भविष्य की सम्भावनाओं को भी शब्द दे सकते हैं। वे ऐसे दृश्य रच सकते हैं जिन्हें…

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Karbala

मनक़बत

डॉ. वीरेन्द्र कुमार 'शेखर' हक़ी़क़तों को बताती,है करबला अब तक उन्हीं का सोग मनाती, है करबला अब तक शहादतों को जो ईमान मानते आए उन्हीं को राह दिखाती, है करबला…

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दुनिया देखती है तब मानती है

दुनिया देखती है तब मानती है

एक समय था जब किसी राजा, प्रशासक, न्यायाधीश, शिक्षक या व्यापारी के कार्यों को बहुत कम लोग देख पाते थे। सूचना का प्रवाह धीमा था और समाज सीमित दायरे में…

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युद्ध के उन्मूलम में सबसे बड़ी बाधा है निजीकरण

युद्ध के उन्मूलम में सबसे बड़ी बाधा है निजीकरण

युद्ध आजकल केवल राजनीतिक या सामरिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि वह एक विशाल आर्थिक संरचना का भी हिस्सा बन चुका है। आज रक्षा उद्योग विश्व के सबसे बड़े…

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प्रज्ञा, करुणा और उनके अनुसार कर्म करने का औचित्य

नागार्जुन के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु अनेक कारणों और परिस्थितियों पर निर्भर होकर अस्तित्व में आती है। कोई भी वस्तु अपने बल पर न उत्पन्न होती है और न…

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Urdu-poet-bashir-badr-dies-at-91-2026-05-28

ग़ज़लें पहले शराब पीती थीं, नीम का रस पिला रहे हैं हम : डॉ बशीर बद्र

शायरी का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक चेतना का एक उज्ज्वल अध्याय है। यह केवल शब्दों की कलात्मक सजावट नहीं, बल्कि मानव हृदय की संवेदनाओं, अनुभूतियों और जीवन-दर्शन की एक…

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इश्क़, प्रेम… प्यार, कैसे व्यक्त करूँ इस भाव को ?

इश्क़—यह शब्द अपने भीतर एक ऐसा मधुर संगीत समेटे हुए है, जिसकी प्रतिध्वनि मनुष्य के अस्तित्व के सबसे गहरे कक्षों तक सुनाई देती है। यह केवल आकर्षण नहीं, केवल चाहत…

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